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पहली सिने पार्श्वगायिका शमशाद बेगम पर वृतचित्र का प्रदर्शन
Wednesday, Apr 10 2019
 

नयी दिल्ली 10 अप्रैल “मेरे पिया गए रंंगून वहां से किया है टेलीफून” जैसे मशहूर गीत को स्वरबद्ध करने वाली पार्श्व गायिका शमशाद बेगम की जन्मशती के मौके पर 12 अप्रैल को यहां राष्ट्रीय इंदिरा गांधी कला केंद्र में एक डाक्यूमेंटरी का प्रदर्शन किया जायेगा। जलियांवाला बाग घटना के अगले दिन 14 अप्रैल 1919 को लाहौर में जन्मी शमशाद बेगम पर यह फ़िल्म प्रसिद्ध फ़िल्म पत्रकार राजीव श्रीवास्तव ने बनायी है। वे जयप्रकाश नारायण, मुकेश पर भी फ़िल्म बना चुके हैं। फ़िल्म में ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित शमशाद बेगम का एक साक्षात्कार भी है। वर्ष 1940 से 1960 के बीच करीब छह हज़ार गीत गा चुकी इस गायिका पर बनी फिल्म में आवाज़ मशहूर उद्घोषक अमीन सयानी की हैं। शमशाद बेगम के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर ‘राष्ट्रीय फिल्म संग्रहालय’से सहयोग से बनी यह फ़िल्म एक घण्टे की अवधि की है। डॉ श्रीवास्तव ने यूनी को बताया कि फिल्म में गायिका शमशाद बेगम नेे स्वयं अपने जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को बताया है। उन दिनों आकाशवाणी के लाहौर, जालन्धर, दिल्ली और लखनऊ केंद्रों पर गाते हुए उनकी अत्यधिक लोकप्रियता से ही उन्हें फिल्मों में गाने का आमन्त्रण मिला। उन्होंनेे राज कपूर, मदन मोहन, किशोर कुमार जैसे लोगों की सहायता की। कैसे वो उस समय के शीर्ष नायक-गायक कुन्दन लाल सहगल से मिलीं और कैसे वो हिन्दू परिवार में प्रेम विवाह कर सदा के लिए भारत में बस गयीं, इन सब का विवरण इस फिल्म में देखा जा सकता है। महात्मा गांधी के निधन पर विशेष रूप से शमशाद बेगम द्वारा गाया गया दुर्लभ ‘श्रद्धांजलि गीत’ इस फिल्म का हिस्सा है। फिल्म ‘पाकीजा’ का लोकप्रिय गीत ‘इन्हीं लोगों ने ले लीन्हा दुपट्टा मेरा’ वर्षों पूर्व शमशाद गा चुकी थीं, उसकी भी रोचक कथा इस फिल्म में सम्मिलित है। डॉ श्रीवास्तव ने बताया कि 94 वर्ष उम्र में भी वह पूर्ण रूप से स्वस्थ, सक्रिय और हंसमुख थीं। उन्हें अपने बालपन से लेकर समस्त महत्वपूर्ण घटनाएं याद थी। इस फ़िल्म को जब उनके घर उन्हें दिखाया गया तो वो प्रसन्नता से फूली नहीं समायी। उनके मुख पर किसी छोटे बच्चे की निश्छल मुस्कान थी। उन्होंने स्वयं ही गोवा में उस वर्ष आयोजित होने वाले भारत के अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में इस फिल्म के प्रथम प्रदर्शन के अवसर पर उपस्थित रहने की बात कही थी। घर पर अपनी ये फिल्म देखने के दस दिनों के अन्दर ही 23 अप्रैल 2013 को उनका निधन हो गया। उस समय उनकी आयु 94 वर्ष नौ दिन थी। शमशाद बेगम के इस जन्मशती वर्ष में ही उन पर शोधपूर्ण पुस्तक लिखने के कार्य में जुटे डॉ राजीव श्रीवास्तव पूर्व में गायक मुकेश और संगीतकार कल्याणजी-आनन्दजी पर पुस्तक लिख चुके हैं साथ ही उन पर फिल्म का निर्माण एवं निर्देशन भी कर चुके हैं। ‘ शमशाद बेगम पर सरकार ने एक डाक टिकट भी जारी किया है। शमशाद बेगम के स्वरबद्ध मशहूर गीतों में ‘रेश्मी सलवार कुर्ता जाली का’, ‘कहीं आर कहीं पार’, ‘कजरा मोहब्बत वाला’, ‘कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना’, ‘लेके पहला-पहला प्यार’ जैसे गीत शामिल हैं। 

 
 
   
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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